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वैतरणी पार विकास मानव मानवता गुलाम मानसिकता बेरोजगारी परिवार आक्रोश पागलपन की है यार शिर्क की हद धरातल छुआ छूत सुखी बैगैरत इंसान की समाज हद नज़र प्रभात

Hindi शोषण अत्याचार की हद Poems